Saturday, July 13, 2024
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Ankylosing Spondylitis : बेहतर नींद के लिए कारगर है यह उपाए

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Ankylosing Spondylitis (AS) के मरीजों में नींद की समस्या आम होती है। सोते समय दर्द और बेचैनी की स्थिति इनकी नींद के रास्ते की बडी बाधा है। जबकि, बेहतर नींद लेना ऐसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी होता है क्योंकि अगर अच्छी नींद नहीं ली तो यह स्थिति भी इंफ्लामेशन बढने का कारण बन सकती है। हम यहां आपको कुछ ऐसे उपाए बता रहे हैं, जिसकी मदद से आप बेहतर नींद पाने का प्रयास कर सकते हैं :


नई दिल्ली : लॉस एंजिल्स में सिनाई स्पाइन सेंटर में स्पाइन इंजरी के प्रबंध निदेशक डॅा नील आनंद के मुताबिक एएस से पीडित मरीजों के लिए बेहतर नींद बेहद जरूरी है। बेहतर नींद इंफ्लामेशन को कम करने में मददगार साबित होती है। अच्छी नींद पाने के लिए मरीजों को अपने बिस्तर को भी अपने हिसाब से तैयार करने की जरूरत है। आप अपने बिस्तर को अपने शरीर के हिसाब से आरामदायक बना सकते हैं। यह आपको अच्छी नींद दिलाने में मदद करेगी। फ्रंटियर्स इन न्यूरोलॉजी की शोध में पाया गया कि खराब नींद उच्च स्तर के इंफ्लामेट्री बायोमार्कर से जुड़ी है।

इन उपायों को अपनाकर पा सकते हैं बेहतर नींद

 

1. मीडियम-फर्म गद्दे को अपनाएं :
आमतौर पर यह धारणा है कि पीठ दर्द वाले लोगों को कठोर गद्दे या बिस्तर पर सोना चाहिए लेकिन एएस मरीजों के मामले में यह फॉर्मूला फिट नहीं बैठता है। डॉ आनंद के मुताबिक इस संबंध में शोध के परिणाम कुछ और ही कहते हैं। वास्तव में, एएस से पीडित मरीजों के लिए मीडियम-फर्म गद्दे आरामदायक साबित होते हैं। गद्दे के चयन और पीठ दर्द पर 39 अध्ययनों को कवर करने वाली एक शोध समीक्षा में पाया गया कि मीडियम-फर्म वाले गद्दों से पीठ दर्द वाले लोगों को अधिक लाभ मिलता है। उन्हें इसपर गहरी नींद भी आती है।

 

2. सही तकिए का करें चयन :
एएस मरीजों अगर सोने के लिए सही तकिए का चयन करें तो बेहतर और गहरी नींद पाने में उन्हें मदद मिल सकती है। अगर आप सिर्फ करवट लेकर सोते हैं तो आपके लिए लंबा तकिया फायदेमंद साबित हो सकता है। कुछ तकिए यू सेप के होते हैं, जिन्हें आप गर्दन के लिए प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा तकिए की लंबाई भी नींद में मदद करती है। यदि आप पीठ के बल सोते हैं तो घुटनों के नीचे एक छोटा और मुलायम तकिया रखें। यह आपकी रीढ पर दबाव कम करेंगा और रीढ को अनावश्यक तनाव से बचाएगा। इससे दर्द में भी आराम मिलेगा और बेहतर नींद आएगी।

 

सर्वाइकल कंटूर पिलो भी कर सकते हैं ट्राई :
डॉ. आनंद के मुताबिक बेहतर नींद के लिए गर्दन को सही पोजीशन में रखना जरूरी है। एएस वाले कई मरीजों ने सर्वाइकल कंटूर पिलो को मददगार बताया है। यह सिर और रीढ की हड्डी को एक लाइन में रखता है और इससे गर्दन को सपोर्ट मिलता है। इसकी बनावट ऐसी होती है कि यह आपकी शरीर के आकार में ढल सकता है। यह रीढ की हड्डी को अनावश्यक तरीके से मुडने से न केवल रोकता है बल्कि उसके तनाव को भी कम करता है।

 

4. आई मास्क का कर सकते हैं उपयोग :
कई बार नींद में रोशनी भी बाधा बनती है। अपनी आंखों को ढककर आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं। इस संबंध में किए गए गई शोध यह प्रमाणित करते हैं कि आंखों का मास्क उपयोग करने से बेहतर नींद लाई जा सकती है। डॉ. आनंद के मुताबिक एएस से पीडित एक मरीज को वह सबकुछ करना चाहिए, जिससे उन्हें बेहतर नींद आए। चाहे वह सोने का समय हो, आंखों पर मास्क का प्रयोग हो या नींद लाने में मददगार संगीत हो। सबकुछ अपनाकर आप बेहतर नींद की दिशा में कोशिश कर सकते हैं।

 

5. स्लीप-डिज़ाइन किए गए इयरप्लग :
एएस से पीडित मरीजों की नींद में शोरगुल भी एक बडी बाधा साबित होती है। अगर नींद आती भी है तो साउंड स्लीप नहीं होती। जरा सी आहट या आवाज से उनकी नींद खुल सकती है। इस ​स्थिति से बचने के लिए स्लीप-डिजाइन इयर प्लग्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। अध्ययन में यह साबित हो चुका है कि शोर भरे वातावरण में इयर प्लग्स के इस्तेमाल से गहरी नींद हासिल की जा सकती है। इससे नींद से संबंधित हार्मोन-मेलाटोनिन और कोर्टिसोल के संतुलन में भी सुधार किया जा सकता है।

 

6. माइंडफुलनेस ऐप के साथ आसान सांस लें :
एएस से पीडित व्यक्ति जब सोता है तो नींद की स्थिति में एक सामान्य व्यक्ति के मुकाबले उनका दिमाग अधिक सक्रिय रहता हैं। डॉ शिफलेट के मुताबिक अपने सोने के समय से एक घंटे पहले लगातार खुले वातावरण में रहें, जहां हवा आती हो, पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं ताकि आप आधी रात को प्यास से न उठें, और देर रात को खाना खाने की आदत से बचें।
एक स्लीप टूल भी है, जो आपकी बेहतर नींद में मदद कर सकता है। इसका नाम माइंडफुलनेस ऐप है जो गहरी साँस लेने से संबंधित व्यायाम करने में भी मददगार साबित होता है। इस एप में कई ऐसी रिलेक्स प्रोग्रामिंग है जो बेहतर नींद और दर्द प्रबंधन में मरीजों के लिए मददगार सा​बित हो सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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