Friday, June 21, 2024
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Research: तो ऐसे बढती है सर्जरी के बाद संक्रमण की संभावना 

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 एनआईएचआर के अध्ययन में सामने आया क्यों बढती है सर्जरी के बाद संकमण की संभावना

नई दिल्ली।टीम डिजिटल :
सर्जरी के बाद संक्रमण (infection after surgery) एक आम समस्या है। सर्जरी करने वाला विशेषज्ञ और मरीज दोनों अपनी तरफ से सतर्कता बरते तो सर्जरी के बाद संक्रमण को टाला जा सकता है। हाल ही में एक अध्ययन के दौरान जिन तथ्यों का खुलासा हुआ है, उससे न केवल पूरी दुनिया में सर्जरी के बाद मरीजों की संक्रमण से सुरक्षा (Protection of patients from infection after surgery) तय होगी बल्कि इससे सर्जरी की प्रतीक्षा सूची (surgery waiting list) को भी कम कर मरीजों का उपचार शीघ्र करने की प्रक्रिया को बल मिलेगा। 
Latest Research: तो ऐसे बढती है सर्जरी के बाद संक्रमण की संभावना 
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‘द लैंसेट’ में प्रकाशित सर्जरी विशेषज्ञों के दो शोधों से प्राप्त निष्कर्ष पूरी दुनिया के हजारों रोगियों की सुरक्षित सर्जरी (safe surgery) करने में मदद करेंगे। खास कर दुनिया के दक्षिणी भाग में इसका सबसे अधिक लाभ पहुुंचेगा।
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शोधकर्ताओं ने पाया कि सर्जरी में जख्मों को सिलने (स्टिच करने) से ठीक पहले नियमित रूप से दस्ताने और औजार बदलने से सर्जरी की साइट पर संक्रमण (infection at the site of surgery) एसएसआई (Surgical Site Infection) काफी कम हो सकता है जो कि सर्जरी के बाद होने वाली दुनिया की सबसे आम समस्या है। उन्होंने एक नए टूलकिट का ट्रॉयल किया जो अस्पतालों को महामारी, हीटवेव, जाड़े में ज़्यादा मरीजों के दबाव और प्राकृतिक आपदाओं से बेहतर निपटने के लिए तैयार करेगा। नतीजतन, पहले से नियोजित सर्जरी (pre-planned surgery) रद्द करने के मामले पूरी दुनिया में कम होंगे।

सर्जरी की प्रक्रिया से जुड़ा है संक्रमण का नाता :

एलएमआईसी (Lower Middle Income countries) में मरीजों को जख्म का संक्रमण ज्यादा अनुपात में होता है। हालांकि शोधकर्ताओं ने भारत, बेनिन, घाना, मैक्सिको, नाइजीरिया, रवांडा और दक्षिण अफ्रीका में ट्रॉयल के बाद देखा कि पेट के जख्म सिलने के दौरान दस्ताने और औजार नियमित रूप से बदलने पर इस तरह के संक्रमण से बचा जा सकता है। एसएसआई ((Surgical Site Infection) के 8 मामलों में 1 में यह देखा गया।
‘चीता’ ट्रॉयल इंगलैंड के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ रिसर्च (एनआईएचआर) के आर्थिक सहयोग से किया गया था। शोधकर्ताओं ने द लैंसेट में अपने निष्कर्ष प्रकाशित करते हुए इस प्रक्रिया (आदत) को सब जगह, खास कर एसएसआई (Surgical Site Infection) की अधिक समस्या वाले देशों में लागू करने की मांग कर रहे हैं।
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बर्मिंघम विश्वविद्यालय से जुड़े शोध के सह-लेखक अनील भंगू के मुताबिक, ‘सर्जरी की साइट पर संक्रमण (Surgical Site Infection) सर्जरी के बाद होने वाली दुनिया की सबसे आम समस्या है। मरीज और स्वास्थ्य सेवा दोनों को इसकी भारी कीमत चुकानी होती है। हमारे शोध से यह सामने आया है कि दस्ताने और औजार नियमित बदलने का लाभ न केवल पूरी दुनिया को मिलेगा बल्कि सर्जरी की विभिन्न परिस्थितियों में इससे संक्रमण भी कम होगा। इस आसान प्रयास से एसएसआई (Surgical Site Infection) के मामलों  में 13 प्रतिशत की कमी आ सकती है। यह सरल और किफायती भी साबित होगा।’’

Surgical Site Infection से सीधे पडती है मरीज को आर्थिक चोट :

एक अन्य सह-लेखक ग्लोबल सर्ज इंडिया हब के डॉ. ध्रुव घोष के मुताबिक, ‘‘मरीज जिन्हें एसएसआई (Surgical Site Infection) हो जाता है दर्द, विकलांगता, जख्म खुलने के जोखिम के साथ-साथ आसानी से नहीं भरने की समस्या और फिर ठीक होने में अधिक समय लगने और मानसिक चिंता से भी परेशान हो जाते हैं।
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ऐसे में जहां भी रोगियों को इलाज के लिए भुगतान करना पड़ता है यह किसी आपदा की तरह होता है और इलाज के बाद रोगी के आर्थिक तंगी में फंसने का खतरा रहता है। ऐसे में जख़्म बंद करने (सिलने) से ठीक पहले दस्ताने और औजार बदलने का सरल और सस्ता उपाय करना किसी भी अस्पताल के सर्जन के लिए बहुत आसान है और इसका लाभ बहुत व्यापक है।”

सर्जरी की तैयारी का इंडेक्स

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एनआईएचआर ग्लोबल रिसर्च हेल्थ यूनिट के विशेषज्ञों ने द लैंसेट में ग्लोबल सर्जरी पर एक ‘surgical preparedness index’ (एसपीआई) प्रकाशित किया। पूरी दुनिया के अस्पताल किस सीमा तक कोविड-19 के दौरान भी वैकल्पिक सर्जरी करने में सक्षम थे, यह इसके आकलन का महत्वपूर्ण अध्ययन है।
शोधकर्ताओं ने अस्पतालों के विभिन्न फीचरों की पहचान की, जिनकी वजह से वे अधिक दबाव के दौरान सर्जरी के लिए तैयार या फिर कम तैयार थे। उन्होंने कोविड-19 को इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना हालांकि इस तथ्य को भी सामने रखा कि स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था हर साल तमाम अन्य वजहों से दबाव में आती है। सीजन के दबाव से लेकर प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध तक का दबाव रहता है।
32 देशों के चिकित्सकों की एक टीम द्वारा डिजाइन किया गया एसपीआई अस्पतालों का मूल्यांकन कई मानकों पर करता है जैसे कि इन्फ्रास्ट्रक्चर, इक्वीपमेंट, स्टाफ और वैकल्पिक सर्जरी में प्रयुक्त प्रक्रियाएं आदि। एसपीआई स्कोर (SPI Score) जितना अधिक होगा अस्पताल बाधाओं से निपटने के लिए उतना तैयार माना जाएगा।
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एसपीआई टूल (SPI Tool) बनाने के बाद विशेषज्ञों ने 119 देशों के 1,632 अस्पतालों से जुड़े 4,714 चिकित्सकों से उनके स्थानीय सर्जरी विभाग की तैयारियों का आकलन करने को कहा। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज लुधियाना के प्रोफेसर और इस शोध पत्र के लेखकों में से एक प्रो. परवेज हक ने कहा कि “कोविड-19 के दौरान कुल मिलाकर पूरी दुनिया के अधिकतर अस्पताल सर्जरी के लिए सही से तैयार नहीं थे और शल्य उपचारों की संख्या में बड़ी गिरावट देखनी पड़ी। डॉ. हक ने यह भी कहा कि हमारी टीम ने देखा कि किसी अस्पताल के एसपीआई स्कोर में 10 पॉइंट की वृद्धि का अर्थ चार अधिक रोगियों की सर्जरी है जहां प्रतीक्षा सूची में प्रति 100 रोगियों की सर्जरी हुई थी।
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शोधपत्र के प्रमुख लेखक बर्मिंघम विश्वविद्यालय के जेम्स ग्लास्बे के मुताबिक, “हमारा नया टूल पूरी दुनिया के अस्पतालों को तमाम बाहरी चुनौतियों से निपटने में काम आएगा, जो कि महामारी से लेकर हीटवेव, कड़ाके की ठंड और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में अक्सर आती हैं। हमें विश्वास है कि इसकी मदद से अस्पताल प्रतीक्षा सूची के मरीजों का इलाज तेज़ी से कर पाएंगे और रोगियों के इलाज में ज्यादा देर नहीं होगी। यह टूल पूरी दुनिया के किसी भी अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी और प्रबंधक आसानी से उपयोग कर सकते हैं। नियमित रूप से उपयोग कर अस्पतालों और रोगियों को भावी बाधाओं से बचा सकते हैं।’’
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बर्मिंघम विश्वविद्यालय में सर्जरी के अध्यक्ष और इंग्लैंड के रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स में क्लिनिकल रिसर्च के निदेशक प्रोफेसर डायोन मॉर्टन के मुताबिक, ‘‘हालांकि सर्जरी के बाद होने वाली सभी मौतों को टाला नहीं जा सकता है लेकिन बहुतों को रोका जा सकता है। इसके लिए अनुसंधान, स्टाफ के प्रशिक्षण, उपकरण, और अस्पताल में बेहतर सुविधाओं पर निवेश बढ़ाना होगा। हमें पूरी दुनिया में सर्जरी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निवेश करना ही चाहिए।’’
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