Tuesday, April 16, 2024
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Delhi Aiims की बडी कामयाबी : Kidney Transplant फेल्योर के लिए जिम्मेदार BK Virus का दो घंटे में अब चलेगा पता

किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों में बीके वायरस संक्रमण (BK virus infection in kidney transplant patients) होने के कारण किडनी ट्रांसप्लांट फेल होने का उच्च जोखिम (High risk of kidney transplant failure) बना रहता है।

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दिल्ली एम्स (DelhiAiims) विशेषज्ञों ने नैनोएलएएमपी (nanoLAMP) टेस्ट विकसित किया

Delhi Aiims News : दिल्ली एम्स (Aiims Delhi) के विशेषज्ञों ने किडनी ट्रांसप्लांट फेल्योर को रोकने (Preventing kidney transplant failure) के लिए एक नई जांच प्रक्रिया (new testing process) विकसित की है। एम्स विशेषज्ञों का दावा है कि उन्होंने एक किफायती और शीघ्रता से रिजल्ट देने वाली जांच पद्धति (Economical and quick test method) विकिसत की है, जिसकी मदद से संक्रणकारी वायरस बीके (bk virus) का पता लगाया जा सकता है।

महज दो घंटे में पकडा जाएगा BK Virus  

एम्स (Delhi Aiims) विशेषज्ञों के मुताबिक, किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों में बीके वायरस संक्रमण (BK virus infection in kidney transplant patients) होने के कारण किडनी ट्रांसप्लांट फेल होने का उच्च जोखिम (High risk of kidney transplant failure) बना रहता है। यह वायरस विशेषतौर पर उन मरीजों को तेजी से संक्रमित करता है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर (immune system weak) होता है। समय से इस वायरस का पता चल जाने के बाद मरीज को उपचार देकर उनका किडनी ट्रांसप्लांट को सफल (Kidney transplant successful) किया जा सकता है।
Kidney Transplant फेल्यिोर के लिए जिम्मेदार BK Virus का दो घंटे में अब चलेगा पता
Kidney Transplant फेल्यिोर के लिए जिम्मेदार BK Virus का दो घंटे में अब चलेगा पता | Photo : Canva
विशेषज्ञों (delhi aiims experts) का कहना है कि नैनोएलएएमपी (nanoLAMP) की मदद से वायरस का न केवल शीघ्र पता लगाया जा सकेगा बल्कि ट्रांसप्लांट के बाद किडनी फेल होने के जोखिम (Risk of kidney failure after transplant) को भी कम करने में सफलता मिलेगी।
इससे किडनी ट्रांसप्लांट फेल के दर (Kidney transplant failure rate) में भी अप्रत्याशित कमी आएगी। इस खास जांच विधि (Aiims special test method for BK Virus) को एम्स के एनाटॉमी विभाग  (Anatomy Department of Delhi AIIMS) ने विकसित किया है, जिसकी मदद से महज दो घंटों में ही वायरस का पता लगाना संभव हो जाएगा। एम्स की रिसर्च टीम (AIIMS research team) ने इस जांच का नाम नैनोएलएएमपी (Loop-Mediated Isothermal Amplification) रखा है।

किडनी की बीमारी की वजह बनता है बीके वायरस

एम्स की रिसर्च टीम में शामिल डॉ. सुनील कुमार (Dr. Sunil Kumar Delhi AIIMS) के मुताबिक, बीके वायरस संक्रमण (bk virus infection) की वजह से किडनी से संबंधित समस्याएं (kidney related problems) उभरती है। इस वायरस के संक्रमण से प्रत्येक वर्ष 5 से 10 प्रतिशत किडनी ट्रांसप्लांट फेल हो जाते हैं (Every year 5 to 10 percent of kidney transplants fail.)।
किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों में इस वायरस संक्रमण को नियंत्रित (How to control BK virus infection) करने किडनी फंक्शन का मूल्यांकन (Kidney function evaluation) करने के साथ बीके वायरस के शीघ्र निदान (Early diagnosis of BK virus) की आवश्यकता होती है।

बेहद किफायती होगी nanoLAMP जांच प्रक्रिया 

Kidney Transplant फेल्यिोर के लिए जिम्मेदार BK Virus का दो घंटे में अब चलेगा पता
Kidney Transplant फेल्यिोर के लिए जिम्मेदार BK Virus का दो घंटे में अब चलेगा पता | Photo : Canva
बीके वायरस का पता लगाने के लिए (Test to detect BK virus) वैसे तो कई तरह की जांच उपलब्ध है लेकिन यह काफी महंगे हैं। जानकारी के मुताबिक, इसकी जांच के लिए मरीजों को करीब 5 हजार रुपए (Cost of testing to detect BK virus) से अधिक खर्च करने पडते हैं। जबकि, एम्स विशेषज्ञों द्वारा विकसित नैनोएलएएमपी (NanoLAMP developed by Delhi AIIMS experts) के जरिए महज 2 डॉलर (200 रुपए से भी कम) से भी कम कीमत में इस वायरस का पता लगाया जा सकेगा। एम्स (Delhi Aiims) विशेषज्ञों के मुताबिक इस जांच विधि में नए प्राइमरों और सोने के नैनो कणों के कॉम्प्लेक्स का इस्तेमाल किया गया है।

हर साल 2 लाख लोगों की किडनी होती है फेल 

भारत में किडनी फेल मरीजों के आंकडे (Statistics of kidney failure patients in India) लगातार बढ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रत्येक वर्ष करीब 2 लाख मरीजों की किडनी फेल हो जाती है। इन सभी मरीजों को नियमित डायलिसिस (regular dialysis) या फिर किडनी ट्रांसप्लांट (kidney transplant) की जरूरत होती है।
हालांकि, इनमें से महज 12 हजार लोगों को ही किडनी ट्रांसप्लांट संभव (Kidney transplant possible for only 12 thousand people every year) हो पाती है। अगर किडनी डोनेशन की दर (kidney donation rate) में तेजी आएगी तो किडनी ट्रांसप्लांट कर और ज्यादा लोगों की समय रहते जान बचाई जा सकती है।


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: caasindia.in में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को caasindia.in के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। caasindia.in लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी/विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

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