Saturday, July 13, 2024
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Gurugram : जिनके हौसलों के आगे कैंसर ने भी मान ली हार 

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कैंसर को जीत कर अब दूसरे रोगियों की कर रहे हैं मदद

Gurugram : कैंसर (Cancer) का नाम सुनकर ही जहां लोग ईश्वर के आगे जीवन के लिए नतमस्तक हो जाते हैं। जो बीमारी दुनियाभर में प्रतिवर्ष लाखों की तादाद में लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है, ऐसी बीमारी से कोई लडकर उबर जाए, तो इसे आत्मविश्वास से उपजी हुई ताकत नहीं तो और क्या कहेंगे।
कैंसर (Cancer) से उबरना और फिर से जिंदगी में वापसी करना तो संघर्ष है लेकिन इस बीमारी से उबरने के बाद कैंसर प्रति सामाजिक चेतना फैलाना, दूसरे मरीजों के मन में कैंसर के मुकाबले को लेकर हौसला पैदा करना, मरीजों को इमोशनल सपोर्ट देकर जीने की चाह पैदा करना, यह कवायद अद्भुत और प्ररित करने वाला है।
विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) के मौके पर हम दो ऐसे कैंसर वॉरियर्स (Cancer Warriors) की कहानी आपके लिए लाए हैं, जिनकी संघर्ष गाथा सुनकर आप कैंसर जैसी बीमारियों के प्रति न केवल सचेत और सतर्क हो सकेंगे बल्कि विपरीत परिस्थितियों के दौरान मुकाबले की प्रेरणा भी मिलेगी।

Cancer को मात देकर सिदार्थ से बन गए ‘फ्लाइंग सिड’

कैंसर कैंसर सर्वाइवर (cancer survivor) सिद्धार्थ घोष (फ्लाइंग सिद्धार्थ) कहते हैं, “मैं पूरी जिंदगी भागता रहा हूं। क्रिकेट के मैदान से लेकर स्कूल में फुटबॉल फील्ड तक और मैं करीब दशक से भी अधिक समय तक मैराथन धावक रह चुका हूं। तभी अचानक जिंदगी ने करवट ली और मेरे सामने एक बडी चुनौती आ खडी हुई।
देखते ही देखते मैं किडनी के कैंसर (kidney cancer) का मरीज बन गया। मेरी भागती-दौड़ती जिंदगी अचानक से थम गई। फिर खुद को संभाला और बाद मैं इस रोग के खिलाफ अ​भियान में जुट गया। हालांकि, कैंसर होने की जानकारी मिलने के बाद मुझे एक जोरदार झटका जरूर लगा। जिस दिन कैंसर डायग्नॉज़ हुआ, उससे कुछ ही समय पहले मैंने एक मैराथन दौड पूरी की थी। इसके अलावा एक दिन पहले एक कार्पोर्रेट क्रिकेट मैच में भी हिस्सा लिया था।
पेशाब में खून दिखने के बाद मैंने कुछ जरूरी जांच करवाए थे। जांच में डॉक्टरों ने पाया कि मेरी दायीं किडनी का आकार एक गोल्फ बॉल से भी अधिक बड़ा हो चुका था। कैंसर का विकास (development of cancer) इतनी तेजी से हुआ था कि कैंसरग्रस्त कोशिकाओं (cancerous cells) ने पूरी किडनी को ढक लिया था। फिर यहां से रिकवरी की कोशिशें शुरू हुई।
करीब तीन से चार महीने तक कई मोर्चों पर संघर्ष करने के बाद मैं ठीक से चलने के लायक हो पाया। फिर सर्जरी हुई और उसके तीन महीने के बाद मैंने हाफ मैराथन में दौड लगाई। इसके ठीक एक साल के बाद, जनवरी 2015 में मैंने फुल मैराथन में भी हिस्सा लिया।
जहां मुझे सबसे बड़ा पुरस्कार मिला। यहां मुझे ‘फ्लाइंग सिड’ के तौर पर एक नई पहचान मिली। यह नाम मुझे मिल्खा सिंह के टाइटल ‘फ्लाइंग सिख’ की तर्ज पर दिया गया था। वर्ष 2019 में अपने कैंसर के सफर के 5 साल पूरे होने पर मैंने एक किताब (कैंसर ऍज़ आइ नो इट’) लिखी। इसे दुनिया के 13 देशों में लॉन्च किया गया।

Cancer से खुद उबर गए अब दूसरों को दे रहे हैं हौसला  

कैंसर को पछाडने वाले एक अन्य वॉरियर संजय डावर कैंसर जागरुकता (cancer awareness) की दिशा में एक उत्साही सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका निभा रहे हैं। संजय फिटनैस प्रेमी होने के साथ एक कुशल लॉन टेनिस प्लेयर भी हैं। कुछ साल पहले जब उन्हें कैंसर होने की जानकारी मिली तो यकायक उनकी सभी गतिविधियां थम सी गई।
कैंसर ने उनकी जिंदगी को जकड लिया था। अपने अनुभवों को साझा करते हुए संजय ने कहा कि, “ वर्ष 2017 में उन्हें लिंफोमा कैंसर (lymphoma cancer) हुआ था। उसके बाद कीमोथेरेपी (Chemotherapy), रेडिएशन (Radiation) का सिलसिला शुरू हुआ। इसके साथ ही इनका दुष्प्रभाव भी इनके जीवन में शामिल हो गया। इस बीच शारीरिक संघर्ष से ज्यादा वो मानसिक रूप से संघर्ष करने लग गए।
उन्होंने खुद को संभाला और अपने हौसले और मानसिक शक्ति की बदौलत कैंसर से मुकाबला (fight cancer) करने में जुट गए। इसका नतीजा यह हुआ कि वे करीब एक साल में कैंसर मुक्त (cancer free) होने में कामयाब रहे।
संजय ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज वे एक बार फिर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हैं और ओल्ड एज होम्स, अनाथालयों, लड़कियों की पढ़ाई, हीलर और कैंसर मरीजों और ऐसे कैंसर कैंसर सर्वाइवर (cancer survivors) की भलाई की भूमिका निभा रहे हैं। केवल इतना ही नहीं, जिन्हें मेडिकल गाइडेंस तथा इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है, ऐसे कैंसर मरीजों (cancer patients) को भी संजय पूरा सपोर्ट दे रहे हैं।”

Gurugram : बाइकर्स ने फैलाई कैंसर जागरुकता 

Grugram : जिनके हौसलों के आगे कैंसर ने भी मान ली हार
Grugram : जिनके हौसलों के आगे कैंसर ने भी मान ली हार
विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) पर कैंसर (Cancer) के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से फोर्टिस हैल्थकेयर (Fortis Healthcare Gurugram) के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (Fortis Memorial Research Institute), गुरुग्राम (Gurugram) से ‘राइड फॉर कैंसर’ (ride for cancer) बाइक रैली (bike rally) को झंडी दिखायी गई।
इस मौके (World Cancer Day 2024) पर आयोजित समारोह को ग्रुप सीईओ अनिल विनायक (Group CEO Anil Vinayak) ने कैंसर सरवाइवर्स, फोर्टिस (Gurugram) के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में संचालित किया। रैली में 70 से ज्यादा हार्ले डेविडसन राइडर्स (harley davidson riders) ने हिस्सा लिया।
इनमें से कुछ कैंसर सरवाइवर्स भी शामिल हुए। रैली का मकसद शीघ्र रोग का निदान (early diagnosis) करने के महत्व, इलाज के उपलब्ध विकल्पों (Available treatment options) और इस रोग पर विजय प्राप्त करने के लिए जरूरी आत्मविश्वास के बारे में लोगों को प्रेरित करना था।
फोर्टिस गुरुग्राम (Fortis Gurugram) से रवाना होकर बाइकर्स की रैली (bikers rally) मोहाली पहुंची। यहां अस्पताल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट्स (Senior Oncologists), हॉस्पीटल स्टाफ और फोर्टिस मैनेजमेंट ने उनका स्वागत किया। बाइकर्स का यह कारवां मोहाली के बाद लुधियाना पहुंचा। यहां से बाइकर्स के अमृतसर पहुंचने के बाद रैली संपन्न हुई।
मेडिकल ऑन्कोलॉजी एंड हेमेटोलॉजी विभाग के वरिष्ठ निदेशक, डॉ. अंकुर बहल (Dr. Ankur Bahl, Senior Director, Department of Medical Oncology and Hematology) ने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा, “इस जागरूकता अभियान (CANCER awareness campaign) के लिए गुरूग्राम से अमृतसर तक की रैली में हिस्सा लेने वाले बाइकर्स के हौंसलों और उत्साह को देखना बेहद रोमांचित करने वाला रहा।
जीसीओओ अनिल विनायक (GCOO Anil Vinayak), ने भी कैंसर के खिलाफ लड़ाई (fight against cancer) में शीघ्र निदान पर बल देते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि, “इस बाइक रैली ने देश में कैंसर के प्रसार (spread of cancer) को लेकर आम लोगों को जागरूक बनाने का प्रयास करने के साथ उन्हें अर्ली डायग्नॉसिस और रैग्युलर स्क्रीनिंग (Early Diagnosis and Regular Screening) के महत्व को भी समझाया है।
यह रैली कैंसर सरवाइवर्स और कैंसर मरीजों को प्रेरित करने और उनके समर्थन में आयोजित की गई। इस आयोजन के माध्यम से कैंसर पर विजय प्राप्त करने वाले वॉरियर्स के साहस और उनकी संकल्पशक्ति को सामने लाने की कोशिश की गई है। इस रैली के माध्यम से कम्युनिटी की भागीदारी का भी संदेश दिया गया।
यह महज एक कार्यक्रम (World Cancer Day) नहीं था बल्कि कैंसर को लेकर एक जागरुक समाज के निर्माण की दिशा में विशेष पहल भी थी। ‘राइड फॉर कैंसर’ के जरिए उम्मीद, ताकत और कैंसर पर जीत हासिल करने के लिए सामूहिक संकल्पशक्ति को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया। इस कार्यक्रम (WORLD CANCER DAY) के दौरान फोर्टिस (Gurugram) की प्रतिबद्धता और हार्ले डेविडसन कम्युनिटी के सपोर्ट ने कैंसर के खिलाफ मजबूत संकल्प शक्ति का महत्वपूर्ण संदेश प्रसारित किया है।


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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