Monday, April 15, 2024
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Kidney Racket: दिल्ली में किडनी रैकेट का खुलासा, 10 गिरफ्तार

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Kidney Racket: पुलिस की पूछताछ में हो सकते हैं बडे खुलासे

 नई दिल्ली।टीम डिजिटल : Kidney Racket: दिल्ली में किडनी रैकेट का खुलासा, 10 गिरफ्तार- दिल्ली में किडनी रैकेट से संबंधित मामले का खुलासा हुआ है। इसमें संलिप्त 10 लोगों को पु​लिस ने गिरफ्तार किया है। जिसमें गैंग का सरगना भी शामिल है। पुलिस अरोपियों में पूछताछ में जुटी है। आशंका है कि पुलिस की इस पूछताछ में किडनी रैकेट से जुडे कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

 राजधानी दिल्ली में किडनी रैकेट (Kidney Racket)  चला रहे पूरे गैंग को पुलिस ने धर दबोचा है। हौजखास थाना पुलिस ने इस मामले में गैंग के सरगना समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान सर्वजीत जैलवाल (37), शैलेश पटेल (23), मोहम्मद लतीफ (24), बिकास (24), रंजीत गुप्ता (43), झोलाछाप सोनू रोहिल्ला (37), डा. सौरभ मित्तल (37), कुलदीप रे विश्वकर्मा (46), ओमप्रकाश शर्मा (48) व मनोज तिवारी (36) के रूप में हुई है।

सौरभ मित्तल दिल्ली के बीएलके हास्पिटल में कार्यरत था। इनमें से चार पीड़ितों की पहचान गुजरात के रघु शर्मा (21), असम के गुवाहाटी निवासी दिवाकर सरकार (32), बंगाल के अश्विनी पांडेय (26) और केरल के कोच्चि निवासी रिजवान (26) के रूप में हुई है।

गुप्त सूचना पर हरकत में आई पुलिस :

दक्षिणी जिले की पुलिस उपायुक्त बेनिता मेरी जैकर के मुताबिक रविवार को हौजखास थाने में गैरकानूनी रूप से संचालित किडनी ट्रांस्प्लांटेशन की एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई। पुलिस को यह जानकारी मिली कि अरोपी खासतौर पर गरीब और आर्थिक रूप से लाचार लोगों को निशाना बनाकर पैसे के बदले किडनी बेचने (Kidney Racket)के लिए प्रेरित करते थे। इनसे प्राप्त किडनी को आरोपी मोटे पैसे वसूलकर बेच देते थे। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बाकायदा एक टीम का गठन किया। सूचना के आधार पर योजना बनाकर पुलिस ने आपोपियों को दबोच लिया।

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली ​कि एक व्यक्ति को किडनी रैकेट (Kidney Racket) के सदस्य हौजखास स्थित एक लैब में प्री-एनिस्थीसिया चेकअप के लिए लेकर आने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने उस निजी लैब के पास जाल बिछाया। इस बीच पीड़ित पिंटू कुमार यादव को आरोपी सर्वजीत और विपिन पेट में दर्द का इलाज कराने का झांसा देकर लैब में लेकर आए लेकिन जब उसे पता चला कि उसे किडनी डोनेशन के लिए लाया गया है तो उनके बीच विवाद शुरू हो गया। इसके बाद वे लोग वहां से चले गए। पुलिस ने ट्रांस्प्लान्टेशन आफ ह्यूमन आर्गन्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

पुलिस ने पिंटू कुमार यादव की निशानदेही पर सर्वजीत जैलवाल और रघु शर्मा तक पहुंची। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि सर्वजीत ने गैंग के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर पहले ही रघु की किडनी निकाल ली है। रघु शर्मा की निशानदेही पर पुलिस की टीम ने पश्चिम विहार स्थित डीडीए फ्लैट्स के ए-ब्लाक में दबिश दी और शैलेष पटेल के साथ तीन पीड़ितों दिवाकर सरकार, अश्विनी पांडेय और रिजवान को ढूढ निकाला।

पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ कि इन्हें वहां गैरकानूनी तरीके से किडनी ट्रांस्प्लांटेशन के लिए लाया गया है। शैलेष उन्हें वहां अपने साथी बिकास और विपिन की मदद से लेकर आया था। उनके पास से पुलिस को कुछ मेडिकल से संबंधित कागजात भी बरामद हुए हेैं। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गैंग ने तीनों पीड़ितों के सारे प्री मेडिकल टेस्ट पहले ही करा लिए थे और वे इनकी किडनी को निकालने वाले थे।

किडनी के लिए जरूरतमंदों और गरीबों को बनाया जाता था निशाना :

पूछताछ में पता चला है कि आरोपित शैलेष पटेल किडनी के लिए आसानी से मान जाने वाले जरूरतमंद लोगोंं की पहचान करता था। पुलिस ने इसके बाद शैलेष और सर्वजीत को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस ने इन दोनों से पूछताछ की तो खुलासा हुआ कि वे जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाकर उनहें विकास और डॉक्टर के पास लेकर आते थे। इसके लिए उन्हें प्रति व्यक्ति 40 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था।

पूछताछ में उन्होंने टेस्टिंग लैब, अस्पतालों का नाम बताया जहां किडनी का ट्रांस्प्लांटेशन किया जाता था। उनमें हरियाणा के गुहाना स्थित श्रीरामचंद्र अस्पताल और दिल्ली के हौजखास इलाके में स्थित एएस हेल्थ स्क्वायर और दिल्ली इंस्टीट्यूट आफ फंक्श्नल इमेजिंग लैब के नाम शामिल हैं।

आरोपित ने पुलिस को बताया कि किडनी ट्रांस्प्लांटेशन की प्रक्रिया के बाद विपिन और बिकास पीड़ितों को भुगतान कर देते थे। इसके बाद पुलिस हौजखास स्थित लैब के फील्ड ब्वाय और एक अन्य आरोपित मोहम्मद लतीफ को गिरफ्तार करने में कामयाब रही। ये लोग किडनी डोनर/सेलर को किडनी की डीटीपीए जांच सहित अन्य संबंधित जांच के लिए लैब लेकर आते थे।

गुहाना के एक अस्पताल में अवैध रूप से सेटअप किया था तैयार :

इस दौरान बिकास और रंजीत गुप्ता को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बिकास जांच होने तक किडनी डोनर/सेलर को अपने पास पश्चिम विहार में रखता था और फिर रंजीत के जरिए डोनर/सेलर को किडनी ट्रांस्प्लांटेशन के लिए सोनीपत के गुहाना में झोलाछाप सोनू के पास भेज देता था। पुलिस ने जब एफएसएल टीम के साथ गुहाना स्थित श्रीरामचंद्र हास्पिटल में छापा मारा तो पाया कि वहां आरोपितों ने ट्रांस्प्लांटेशन के लिए पूरा सेटअप इंस्टॉल किया हुआ है। यहां झोलाछाप सोनू रोहिला कई अन्य बड़े अस्पतालों के डाक्टरों व टेक्नीशियनों की मदद से गैरकानूनी तरीके से किडनी ट्रांस्प्लांटेशन (Kidney Racket) किया करता था।

एफएसएस टीम ने सोनू रोहिला को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर दिल्ली के बीएलके अस्पताल के एनिस्थिसियोलाजिस्ट डा. सौरभ मित्तल और उसके साथियों कुलदीप रे विश्वकर्मा, ओम प्रकाश शर्मा और मनोज तिवारी को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ये तीनों डा. सौरभ मित्तल के साथ बीएलके हास्पिटल में ओटी टेक्निशियन थे।

गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा किया कि कुलदीप रे विश्वकर्मा इस पूरे गैंग का मास्टरमाइंड है। इसने ही बाकी सभी लोगों को इस गैरकानूनी किडनी ट्रांस्प्लांटेशन में शामिल होने के लिए तैयार किया था। अपनी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए इसने ही सोनू रोहिला के क्लीनिक को चुना था। सभी लोगों को काम के मुताबिक कुलदीप ही पैसे का भुगतान करता था। ये सभी पिछह से सात महीनों के बीच सोनीपत के गुहाना स्थित क्लीनिक में 12-14 किडनी ट्रांस्प्लांटेशन कर चुके हैं। दिल्ली के एक अस्पताल में टेक्नीशियन होने और ट्रांसप्लांट सर्जरी में निपुनता नहीं होने के बाद भी उसने कई पीड़ितों का ट्रांस्प्लांटेशन सर्जरी की थी।

Kidney Racket: दिल्ली में किडनी रैकेट का खुलासा, 10 गिरफ्तार

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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