Thursday, July 11, 2024
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Medical Trials : वैज्ञानिकों की बाजीगरी ‘संजीवनी’ से कुछ ही कदम दूर है विज्ञान!

जिस संजीवनी की तलाश में वैज्ञानिक (Scientists in search of Sanjeevani) लंबे समय से जुटे हुए हैं, वह संजीवनी हासिल हो सकती है। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि ऐसी किसी संजीवनी को पानेे में वैज्ञानिक महज एक कदम ही दूर  (Scientists are just one step away from finding Sanjeevani) हैं।

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बस एक बार उपचार और मिलेंगे नतीजे

Medical Trials News : क्या वैज्ञानिकों को वह संजीवनी (Sanjeevani) मिल गई है, जिससे किसी भी रोग का शीघ्र समाधान संभव है? सुनने में यह थोडा हैरानी भरा जरूर लगता है। अगर वैज्ञानिकों की एक नई खोज ( new discovery by scientists) को देखें तो ऐसा संभव हो सकता है।
जिस संजीवनी की तलाश में वैज्ञानिक (Scientists in search of Sanjeevani) लंबे समय से जुटे हुए हैं, वह संजीवनी हासिल हो सकती है। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि ऐसी किसी संजीवनी को पानेे में वैज्ञानिक महज एक कदम ही दूर  (Scientists are just one step away from finding Sanjeevani) हैं। कहा यह भी जा रहा है कि वैज्ञानिकों के इस नए प्रयोग (Medical Trials) की सफलता से बेहतर सेहत, मेटॉबॉलिज्म, कम वजन, लंबा जीवन जैसे नतीजे एक साथ मिल सकते हैं। बस इस प्रयोग के नतीजों की पुष्टि होनी शेष रह गई है।

Medical Trials : क्या है सच्चाई?

Medical Trials : वैज्ञानिकों की बाजीगरी 'संजीवनी' से कुछ ही कदम दूर है विज्ञान!
Medical Trials : वैज्ञानिकों की बाजीगरी ‘संजीवनी’ से कुछ ही कदम दूर है विज्ञान! Photo : Canva
दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाओं (T-cells) को रीप्रोग्राम करने की एक ऐसी प्रक्रिया (A process to reprogram T-cells) को खोज निकाला है, जो हमारे इम्यून सिस्टम (immune system) को बीमारियों से लड़ने का तरीका बताता है। इसके अलावा इससे वजन कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। सबसे खास बात यह है कि ये टी कोशिकाएं सेनेसेंट कोशिकाओं पर हमला करती हैं (T cells attack senescent cells), जिनसे भविष्य में बीमारियों की होने की संभावना रहती है। उम्र बढने के साथ सेनेसेंट कोशिकाओं का निर्माण (formation of senescent cells) ठप हो जाता है। जिसके कारण कई तरह की शारीरिक समस्याएं पैदा होती है।

वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसा किया कमाल

न्यूयॉर्क की कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लेबोरेटरी (Cold Spring Harbor Laboratory, New York) की एक टीम ने टी कोशिकाओं को जेनेटिकली मॉडिफाई (Genetic modification of T cells) कर चिमेरिक एंटीजन रिसेप्टर (chimeric antigen receptor) टी कोशिकाओं में बदल दिया है, जो सेनेसेंट कोशिकाओं पर हमला करने में सक्षम होगी। चूहों पर किए गए इस प्रयोग (Medical Trials) के नतीजे इस कदर हैरतअंगेज हैं, जिन्होंने शोधकर्ताओं को पूरी तरह से चौंका कर रख दिया है।
नेचर एजिंग जर्नल  (Nature Aging Journal) में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, चूहों पर जब इस प्रयोग (Medical Trials) को किया गया, तो शोधकर्ताओं ने यह पाया कि चूहे स्वस्थ्य जीवन जी रहे हैं और उनका वजन भी नियंत्रित हो गया। केवल इतना ही नहीं, चूहों का मेटाबॉलिज्म, ग्लूकोज टॉलरेंस भी बेहतर हो गया और शरीरिक गतिविधियां भी पहले से कहीं अधिक बढ गई। इतने सारे नतीजों को एक साथ पाकर जानकार यह कह रहे हैं कि वैज्ञानिकों को संजीवनी मिल गई (Scientists found Sanjeevani) है।

कारटी कोशिकाओं का ब्लड कैंसर में हो चुका है प्रयोग 

ब्लड कैंसर के उपचार में पहले भी कार-टी कोशिकाओं का इस्तेमाल (Use of CAR-T cells in the treatment of blood cancer) हो चुका है। वर्ष 2017 में इसकी इजाजत भी मिल गई थी। अब जो नए सिरे से रिसर्च किया गया, उसमें उपचार के नतीजे पहले के मुकाबले अधिक सकारात्मक और प्रभावी पाए गए हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब वह बूढे और लाचार हो चुके चूहों को यह उपचार देते हैं, तो वह जवान हो जाते हैं। युवा चूहों पर उपचार का यह प्रयोग उन्हें काफी लंबी उम्र तक जवान बनाए रख रहा है। उपचार की खोज से जुडे किसी भी प्रयोग में इससे पहले ऐसे नतीजे नहीं पाए गए हैं। इस नवीन प्रयोग के परिणाम से शोध करने वाले वैज्ञानिक बेहद उत्साहित हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

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