Sunday, June 23, 2024
HomeEventGangaram Hospital : एक साथ पहुंचे 500 लोग जिन्हें अंग प्रत्यारोपण से...

Gangaram Hospital : एक साथ पहुंचे 500 लोग जिन्हें अंग प्रत्यारोपण से मिली नई जिंदगी

Join Whatsapp Channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
Follow Google News Join Now

Gangaram Hospital : लिवर और किडनी प्रत्यारोपण के बाद रोग मुक्त होकर जीवन जी रहे हैं लोग

नई दिल्ली। टीम डिजिटल : Gangaram Hospital : एक साथ पहुंचे 500 लोग जिन्हें अंग प्रत्यारोपण से मिली नई जिंदगी- अंग प्रत्यारोपण (organ transplant) लिवर और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों के निष्क्रिय हो जाने के बाद जीवन का आखिरी विकल्प रह जाता है। मानव अंगों की उपलब्धता जरूरत से बेहद कम है, ऐसे में अंग प्रत्यारोपण की जटिलता को पार कर स्वस्थ जीवन जीने वाले ऐसे लोगों को हम सौभाग्यशाली मानें तो गलत नहीं होगा।
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल (gangaram hospital) में एक अनोखे मेले का आयोजन किया गया। जिसमें एक साथ 500 ऐसे लोग पहुंचे, जिन्हें अंग प्रत्यारोपण की तकनीक से मौत की मुंह से बाहर निकाला जा चुका है। जीवन का उपहार नाम से आयोजित इस मेले में अंग प्रत्यारोपण के बाद नई जिंदगी पाने वाले इतने सारे लोगों को एक साथ देखकर हर कोई भौंचक रह गया।

मरीजों ने सामाजिक कार्यक्रम और प्रदर्शन में लिया हिस्सा  

Unique fair: 500 people who got new life from organ transplant arrived together
Unique fair: 500 people who got new life from organ transplant arrived together
डिपार्टमेंट ऑफ़ नेफ्रोलॉजी में वाइस-चेयरपर्सन डॉ. मनीष मलिक के मुताबिक, “ट्रांसप्लांट ने मरीजों के जीवन को बदल दिया ताकि वे एक सामान्य जीवन जी सकें और जीवन के इस उपहार का आनंद उठा सकें और अपने परिवार एवं समाज के लिए कुछ कर सकें।
डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड लिवर ट्रांसप्लांट में वाइस-चेयरपर्सन डॉ. उशस्त धीर ने कहा कि “ट्रांसप्लांट नए जीवन की शुरुआत है और आज हम अपने प्राप्तकर्ताओं के इस नए जीवन का जश्न उनके परिवारों की उपस्थिति में मना रहे हैं, जिसमें हमारे 5 साल के सबसे कम उम्र के प्रतिभागी और सबसे वरिष्ठ प्रतिभागी 73 साल की उम्र के शामिल हैं।” सामाजिक आयोजन का माहौल जीवन और सकारात्मकता से भरा था। परिवारों ने प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं द्वारा लाइव प्रदर्शन देखने का आनंद लिया।
[irp posts=”9713″ ]

प्रत्यारोपण के बाद नए जीवन की यात्रा मरीजों ने किया साझा 

Unique fair: 500 people who got new life from organ transplant arrived together
Unique fair: 500 people who got new life from organ transplant arrived together
प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं (ट्रांसप्लांट रेसपिएंट्स) ने मंच पर कपल रैंप वॉक, बेबी शो (ट्रांसप्लांट के बाद बच्चा पैदा करने वाले), फैशन शो, गायन और नृत्य का प्रदर्शन किया। कई मरीजों ने ट्रांसप्लांट की अपनी यात्रा और नए जीवन को दूसरों के साथ साझा किया। मरीजों में से एक, तुषार रश्मी पंत, जिन्होंने सर गंगा राम अस्पताल (Gangaram Hospital) में लिवर ट्रांसप्लांट कराया था, ने अपनी प्रेरक कहानी साझा की और कहा, “मैं अपने ट्रांसप्लांट के बाद उत्तराखंड में सबसे सफल पीएमटी कोचिंग संस्थान चला रहा हूं छात्रों को भविष्य में डॉक्टर बनने के लिए और 12 घंटे से अधिक काम करता हूं।”
एक किडनी ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता बाले ज़मा सेन्ची ने कहा, “मैंने 10 साल पहले सर गंगा राम अस्पताल (Gangaram Hospital) में किडनी ट्रांसप्लांट कराया था और मैं ‘लॉ एंड आर्डर’ को बनाए रखने के अपने कर्तव्य को पूरा करके अपने देश की सेवा करने में सक्षम हूं और मैं नाइजीरिया में ‘डिप्टी जनरल ऑफ़ पुलिस’ के पद पर पदोन्नत हुआ हूं।”
[irp posts=”9704″ ]

जीवन रक्षक और जीवन बदलने वाली प्रक्रिया है अंग प्रत्यारोपण

अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) जीवन रक्षक और जीवन बदलने वाली प्रक्रिया दोनों है। हर साल, अनुमानित 1.5-2 लाख लोगों को गुर्दा प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट)  की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्ष  2022 में केवल 10000 में से एक ही प्राप्त करने में सक्षम थे। सालाना 80000 लोगों को यकृत प्रत्यारोपण (लिवर ट्रांसप्लांट) की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्ष 2022 में 3000 से कम ही प्राप्त करने में सक्षम थे। 10000 लोगों में से जिन्हें आवश्यकता थी, हृदय प्रत्यारोपण (हार्ट ट्रांसप्लांट)  केवल 250 ही प्राप्त कर पाए थे। अधिकांश लोगों को लगता है कि प्रत्यारोपण के बाद का जीवन केवल दवाएं और अस्पताल का दौरा है लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह पूरी तरह सच नहीं है। 
[irp posts=”9677″ ]
सर गंगा राम ट्रस्ट सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. डी.एस. राणा, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे और डॉ. अजय स्वरूप, चेयरमैन (बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट, सर गंगा राम हॉस्पिटल) ने सम्मानित अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं को प्रोत्साहन दिया। ‘ट्रांसप्लांट सोशल कार्यक्रम’ ने मरने के बाद अपने अंगों को गिरवी रखने का संदेश दिया। “दी इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिल्लेट्स 2023 (The international year of Millets 2023)” के को भी बढ़ावा दिया गया और लाइव काउंटर पर रसोइयों द्वारा बाजरा से बने स्वादिष्ट भोजन और स्नैक्स का प्रदर्शन किया गया।
Gangaram Hospital : एक साथ पहुंचे 500 लोग जिन्हें अंग प्रत्यारोपण से मिली नई जिंदगी
Read : Latest Health News|Breaking News|Autoimmune Disease News|Latest Research | on https://caasindia.in|caas india is a multilingual website. You can read news in your preferred language. Change of language is available at Main Menu Bar (At top of website).  


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: caasindia.in में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को caasindia.in के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। caasindia.in लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी/विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

caasindia.in सामुदायिक स्वास्थ्य को समर्पित हेल्थ न्यूज की वेबसाइट

Read : Latest Health News|Breaking News|Autoimmune Disease News|Latest Research | on https://www.caasindia.in|caas india is a multilingual website. You can read news in your preferred language. Change of language is available at Main Menu Bar (At top of website).
Join Whatsapp Channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
Follow Google News Join Now
Caas India - Ankylosing Spondylitis News in Hindi
Caas India - Ankylosing Spondylitis News in Hindihttps://caasindia.in
Welcome to caasindia.in, your go-to destination for the latest ankylosing spondylitis news in hindi, other health news, articles, health tips, lifestyle tips and lateset research in the health sector.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Article