Monday, May 20, 2024
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एएस मरीजों में अल्जाइमर के जोखिम को कम करता है बाइलॉजिक्स 

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AS मरीजों को होती है अल्जाइमर की संभावना

एएस मरीजों में अल्जाइमर के जोखिम को कम करता है बाइलॉजिक्स 
एएस मरीजों में अल्जाइमर के जोखिम को कम करता है बाइलॉजिक्स
नई दिल्ली।टीम डिजिटल :
एएस (AS) मरीजों में अल्जाइमर की संभावना अधिक होती है। इस मामले में किए गए अध्ययनों में विशेषज्ञों ने कुछ एविडेंस पाए हैं लेकिन अगर आप बाइलॉजिक्स (TNF अवरोधक) का इस्तेमाल करते हैं तो अल्जाइमर का जोखिम (Alzheimer’s risk) कम हो सकता है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है कि Ankylosing Spondylitis (AS) मरीज जो बाइलॉजिक्स (Biologics) का उपयोग करते हैं, उन्हें अल्जाइमर का खतरा उनके मुकाबले कम होता है, जो बाइलॉजिस्क का प्रयोग नहीं करते। 
रूमेटिक रोगों (rheumatic diseases) और अन्य प्रतिरक्षा प्रणाली विकारों वाले मरीजों को रोग के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (TNF) अवरोधक दिया जाता है। ये जैविक दवाएं (Biologics)  – जिनमें एडालिमैटेब (हमिरा), सर्टोलिज़ुमैब पेगोल (सिमज़िया), और एटैनरसेप्ट (एनब्रेल) शामिल हैं – टीएनएफ, एक इन्फ्लामेट्री प्रोटीन को लक्षित करके सूजन, दर्द और कठोरता को कम करती हैं।

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एएस मरीजों में अल्जाइमर के जोखिम को कम करता है बाइलॉजिक्स 
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अन्य दवाओं की तरह, TNF अवरोधक से दुष्प्रभाव भी होने की संभावना बनी रहती है। कुछ लोगों को ये दवाएं इन्फ्यूजन विधि से दी जाती है। जिसके बाद कुछ मरीजों में सिरदर्द, मतली या पेट दर्द की समस्या दुष्प्रभाव के तौर पर उभर सकती है। इससे गंभीर संक्रमण, लिम्फोमा या त्वचा कैंसर भी विकसित होने का उच्च जोखिम होता है। 
बावजूद इसके टीएनएफ अवरोधक लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दिया जाता है। टीएनएफ दवाओं का उपयोग करने वाले रूमेटोइड गठिया (आरए) के मरीजों में हृदय रोग होने का जोखिम भी इसे नहीं लेने वाले मरीजों की तुलना में कम होता है। एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि जो लोग TNF अवरोधकों का उपयोग करते हैं उनमें अल्जाइमर रोग विकसित होने की संभावना कम हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह शोध सीधे साबित नहीं करता है कि टीएनएफ अवरोधक अल्जाइमर, पार्किंसंस या मिर्गी से बचाते हैं, क्योंकि यह एक अवलोकन अध्ययन था लेकिन इस शोध को फार्माकोलॉजिकल रिसर्च में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। इसमें यह सुझाव दिया गया है कि टीएनएफ दवाओं का तंत्रिका संबंधी स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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इस अध्ययन ने क्लैलिट हेल्थ सर्विसेज के डेटा का उपयोग किया गया है। यह हेल्थ सर्विस इजराइल में सबसे बड़ा हेल्थ केयर संगठन है। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में एंकिलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस (एएस) वाले मरीजों पर भी ध्यान केेंद्रित किया है। 
शोधकर्ताओं ने क्लैलिट डेटाबेस में 4,000 से अधिक लोगों की पहचान की और उन्हें 20,000 से अधिक नियंत्रण विषयों (जो समान आयु और लिंग के थे लेकिन एएस वाले नहीं थे) से मिलान किया। अध्ययन में शामिल एएस रोगियों की आयु 18 वर्ष से अधिक थी और उन्हें जनवरी 2002 और दिसंबर 2016 के बीच इस बीमारी का पता चला था।
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शोधकर्ताओं ने तब यह पता लगाने के लिए डेटा का विश्लेषण किया कि क्या केवल एएस होने से अल्जाइमर, पार्किंसंस, मिर्गी, और मल्टीपल स्केलेरोसिस विकसित होने का जोखिम बढ सकता है। मल्टीपल स्केलेरोसिस का कोई लिंक नहीं मिला। 
फिर उन्होंने यह पता लगाने के लिए डेटा की समीक्षा की। उन्होंने टीएनएफ अवरोधकों का उपयोग करने वाले एएस रोगियों और रोग-संशोधित एंटी-रूमेटिक ड्रग्स (डीएमएआरडीएस) या गैर-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) का इस्तेमाल करने वाले एएस मरीजों के बीच तुलनात्मक अध्ययन किया। परिणामों के विश्लेषण से यह जानकारी सामने आई कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के संबंध में एएस के साथ अन्य रोग वाले लोगों के परिणाम एक समान हैं।.वहीं जिन रोगियों ने टीएनएफ दवाओं का इस्तेमाल किया, उनमें अल्जाइमर रोग होने की संभावना कम थी।
एएस मरीजों में अल्जाइमर के जोखिम को कम करता है बाइलॉजिक्स 
एएस मरीजों में अल्जाइमर के जोखिम को कम करता है बाइलॉजिक्स
शोधकर्ताओं के मुताबिक कई अध्ययनों से यह पता चला है कि रूमेटोइड गठिया (आरए), सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमैटोसस (एसएलई), और सोजोग्रेन सिंड्रोम जैसे संधि विकारों वाले मरीजों में तंत्रिका संबंधी विकारों का जोखिम अधिक होता है। 
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टीएनएफ अवरोधक एएस के उपचार में उपयोग की जाने वाली कुछ अन्य दवाओं के मुकाबले प्रणालीगत सूजन को कम करके अल्जाइमर के जोखिम को कम कर सकते हैं लेकिन लेखकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि आणविक साक्ष्य भी है कि ऊंचा टीएनएफ-α स्तर [एमिलॉयड-बीटा] उत्पादन को बढ़ा सकता है। इसके अलावा इसकी निकासी को भी कम कर सकता है। जिसके कारण न्यूरोनल हानि और कोशिका की क्षति भी हो सकती है और इसके परिणामस्वरूप संज्ञानात्मक गिरावट आती है।
वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि अल्जाइमर आंशिक रूप से मस्तिष्क में अमाइलॉइड-बीटा प्रोटीन के निर्माण के कारण होता है। इस प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा में सजीले टुकड़े बनते हैं और यह तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संबंध को बाधित करते हैं और अनुभूति में बाधा बन जाते हैं। 

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Photo : freepik

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