Friday, April 19, 2024
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Delhi News : कही आप भी तो नहीं ले रहे हैं Diabetes की जगह ‘कैंसर’ की दवा? जाने क्या हुई है गडबडी

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Delhi News : दवा का नाम बन रही है समस्या

Delhi News : अगर आप शुगर (Diabetes) की दवा समझकर कैंसर की दवा ले रहे हैं, तो क्या होगा? अगर आप ध्यान नहीं दे रहे तो ऐसा संभव है। दवाओं के नाम को लेकर भारी कंफ्यूजन की स्थिति पैदा हो गई है और इसे लेकर चिंता भी व्यक्त की जा रही है।

सॉल्ट नेम से भ्रमित हो रहे हैं लोग 

दरअसल, कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा linamac 5 के नाम से बाजारों में उपलब्ध है। इसकी सॉल्ट लेनालिडोमाइड है और शुगर (diabetes) की दवा linamac भी बाजार में उपलब्ध है। इसका सॉल्ट लिनग्लिप्टिन है। अगर आप भी यह दवा लेते हैं तो सावधानी से पहले सॉल्ट नेम पर गौर जरूर करें। ऐसा हो सकता है कि आपको भी शुगर कि जगह कैंसर या कैंसर की जगह शुगर की दवा दे दी जाए।
Delhi News : कही आप भी तो नहीं ले रहे हैं Diabetes की जगह कैंसर की दवा? जाने क्या हुई है गडबडी
Delhi News : कही आप भी तो नहीं ले रहे हैं Diabetes की जगह कैंसर की दवा? जाने क्या हुई है गडबडी | Photo : freepik
पूर्वी दिल्ली के एक कैमिस्ट रौशन कुमार ने बातचीत के दौरान बताया कि सॉल्ट नेम को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति संभव है। इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है। वैसे तो कोई भी फॉर्माशिस्ट या केमिस्ट दवाइयों के नाम को अच्छी तरह देख और समझकर ही देता है लेकिन कई बार दवाईयों के नाम में समानता से गलतियां होने की संभावना होती है।
रौशन के मुताबिक दवाइयों के नाम एक जैसे नहीं होने चाहिए। केमिस्ट तो नाम के साथ सॉल्ट भी देखकर दवाईयां देते हैं लेकिन लोग कंफ्यूज हो सकते हैं। इस तरह की कंफ्यूजन की स्थिति न हो इसलिए इस मामले पर कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि गलती मैन्युफैक्चरिंग करने वालों की तरफ से तो नहीं हुई है।

Delhi मेडिकल काउंसिल ने जताई चिंता

इस मामले में दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने चिंता व्यक्त की है। वही, इस मामले को गंभीर बताया है। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान कहा है कि इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेने की जरूरत है। इस मामले को लेकर काउंसिल पहले भी अपनी बात रख चुका है।

गलत उपचार का जोखिम बढा

अरुण गुप्‍ता के मुताबिक एक पीडियाट्रिशियन बच्चों के लिए जब भी दवा लिखते हैं, उसमें काफी दिक्कत होती है। यह तो फिर भी एक मामला है लेकिन कई बार यह पाया जाता है कि एक ही नाम की कई दवाएं बाजार में उपलब्ध होती है। सिर्फ उनमें अल्फाबेट भर का ही फर्क होता है।
या उसकी जगह कोई चिन्ह बनाकर उसे अलग दिखाने की कोशिश की जाती है। एक ही तरह के उच्चारण वाली दवाइयों के नाम में स्पेलिंग चेंज कर उसे मौलिक बनाने की पहल की जाती है। इससे गलत उपचार होने का जोखिम बढता है।

ऐसे मामलों पर होनी चाहिए कार्रवाई 

अरूण गुप्ता के मुताबिक ऐसे मामलों पर कार्रवाई कर दोषियों को सजा दी जानी चाहिए। इस गलती की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार जब लोग जल्दबाजी में दवा ले लेते हैं और उसके नाम और सॉल्ट पर ध्यान नहीं देते हैं।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय भी मामले को लेकर है गंभीर 

डीसीजीआई (DCGI) के एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक, यह मामला मंत्रालय के संज्ञान में है। जब भी किसी कंपनी को लाइसेंस जारी किया जाता है, तब दवा का नाम भी तय किया जाता है।
यह सॉल्ट के माध्यम से दिखाया जाता है। इस तरह की गलतियां मैन्युफैक्चरिंग के स्तर पर हो सकती है। यह मैन्युफैक्चरर की जिम्मेदारी है कि वह साल्ट पर आधारित नाम न रखें। सूत्र के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय इस मामले पर हर तरीके से संज्ञान लेगा।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: caasindia.in में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को caasindia.in के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। caasindia.in लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी/विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

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