Monday, April 22, 2024
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Cancer Vaccine : इंटेस्टाइन (Intestine) कैंसर के लिए शीघ्र उपलब्ध हो सकती है वैक्सीन

उपचार महंगा होने के कारण कैंसर का अत्याधुनिक उपचार (advanced cancer treatment) आमलोगों से आज भी दूर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो कैंसर अब लाइलाज बीमारी नहीं है लेकिन इस रोग के विकास को रोकना आज भी विशेषज्ञों के लिए आसान नहीं है।

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मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है Bowel Cancer

Latest Treatment By Cancer Vaccine : दुनिया भर में होने वाली मौतों में कैंसर एक प्रमुख कारण है। विभिन्न प्रकार के कैंसर की वजह से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। पुरुषों में प्रोस्टेट (Prostate Cancer) और लंग्स कैंसर (Lung Cancer) और महिलाओं में ब्रेस्ट (Breast Cancer) और सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) के मामले सबसे अधिक सामने आते हैं। जिसके कारण कैंसर विश्व स्तर पर एक बडी चुनौती बन गई है। इसका उपचार ढूंढने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार जुटे हुए हैं।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के उपचार की दिशा में विशेष प्रगति (Special progress towards cancer treatment) होती हुई दिख रही है। कुछ प्रभावी दवाओं और आधुनिक उपकरणों के जरिए कैंसर के उपचार (Cancer treatment through effective medicines and modern equipment) को पहले के मुकाबले ज्यादा प्रभावी और आसान बनाने में मदद की है।
उपचार महंगा होने के कारण कैंसर का अत्याधुनिक उपचार (advanced cancer treatment) आमलोगों से आज भी दूर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो कैंसर अब लाइलाज बीमारी नहीं है लेकिन इस रोग के विकास को रोकना आज भी विशेषज्ञों के लिए आसान नहीं है। हम यहां आपको यह बात रहे हैं कि कैंसर की रोकथाम के लिए प्रभावी टीकों (Effective vaccines for cancer prevention) की निर्माण प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची है और इसकी उपलब्धता कबतक संभव है।

आंतों के कैंसर के लिए वैक्सीन बनाने में मिली सफलता

Cancer Vaccine : इंटेस्टाइन (Intestine) कैंसर के लिए शीघ्र उपलब्ध हो सकती है वैक्सीन
Cancer Vaccine : इंटेस्टाइन (Intestine) कैंसर के लिए शीघ्र उपलब्ध हो सकती है वैक्सीन | Photo : Canva
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ब्रिटिश इंडियन डॉक्टर टोनी ढिल्लन (British Indian Doctor Tony Dhillon) ने आंत के कैंसर से बचाव (bowel cancer prevention) और मुकाबले के लिए पहले टीके (Cancer Vaccine) को बनाने में सफलता हासिल कर ली है। बताया जा रहा है कि वैक्सीन का पहला चरण का परीक्षण भी सफल रहा है। दूसरे चरण पर विशेषज्ञ काम कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आंतों के कैंसर से पीडित लोगों के लिए यह वैक्सीन (Vaccine for intestinal cancer) मददगार साबित होगी।

Cancer Vaccine : पांच साल से जुटे हुए हैं डॅा ढिल्लो 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले पांच वर्षों से डॉक्टर ढिल्लो ऑस्ट्रेलिया में प्रोफेसर टिम प्राइस (Professor Tim Price in Australia) के साथ मिलकर वैक्सीन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। डॉक्टर  ढिल्लो के मुताबिक, मरीज की सर्जरी से दो सप्ताह पहले टीके की तीन खुराक दी जाएगी। इससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली एक्टिव हो जाएगी। विशेषज्ञ का मानना है कि जब टीका लगाने के बाद मरीज सर्जरी के लिए जाएंगे तो संभव है कि कैंसर नहीं बचेगा। कुछ लोगों में टीके लगाने से ही कैंसर पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

दूसरे चरण के परीक्षण मे जुटे हैं विशेषज्ञ 

इस वैक्सीन को ऑस्ट्रेलिया की क्लिनिकल-स्टेज इम्यूनो-ऑन्कोलॉजी कंपनी इमुजीन (Australian clinical-stage immuno-oncology company Immugene) द्वारा डिजाइन किया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, दूसरे चरण के परीक्षण की तैयारी अब की जा रही है। इसके लिए यूके और ऑस्ट्रेलिया के 10 केंद्रों पर 44 मरीज, चरण-2 के परीक्षण में शामिल होंगे।
इस परीक्षण के एक वर्ष तक चलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों की टीम का कहना है कि यह टीका (Cancer Vaccine) कैंसर के दूसरे प्रकारों पर भी काम कर सकता है। विशेषज्ञ आगे के परीक्षणों में अन्य प्रकार के कैंसर पर भी परीक्षण करने की योजना पर काम कर रहे हैं। शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि अगर सबकुछ योजना के मुताबिक चलता रहा तो वैक्सीन दो-तीन वर्षों में बाजार में उपलब्ध  (Cancer vaccine available in market in two-three years) हो जाएगा।

पैंक्रियाटिक कैंसर के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हैैं वैज्ञानिक

आंतों के कैंसर के लिए टीका (vaccine for intestinal cancer) विकसित करने के साथ ही विश्व में कई वैज्ञानिक कोलन और पैंक्रियाटिक कैंसर के लिए भी टीका ( Pancreatic cancer Vaccine) तैयार करने में जुटे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिक इन दिनों एक नए टीके पर काम कर रहे हैं, जिनसे कोलोरेक्टल और पैंक्रियाटिक कैंसर (Colorectal and pancreatic cancer) के दोबारा विकसित होने के जोखिम को रोकने में मदद कर सकता है।
इन दोनों कैंसर के उपचार के बाद अक्सर इनके दोबारा विकसित होने की संभावना बनी रही है। इस टीके के विकसित होने के बाद ऐसे लोगों को बडी राहत मिल सकती है। जर्नल नेचर मेडिसिन (Journal Nature Medicine) में प्रकाशित निष्कर्ष, AMPLIFY-201 परीक्षण पर आधारित हैं। ये टीका केआरएएस जीन (KRAS gene) के दो आनुवंशिक उत्परिवर्तनों (genetic mutations) के लक्षित करते हैं। ये कोशिकाओं के विभाजन और कैंसर पैदा करने का कारक (Factor that causes cell division and cancer) माने जाते रहे हैं।

भारत में बना सर्वाइकल कैंसर की देसी वैक्सीन 

भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने सर्वाइकल कैंसर के टीके (Cervical Cancer Vaccines) को विकसित करने में कामयाबी हासिल की है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) ने देश की पहली सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन (India’s first cervical cancer vaccine) तैयार कर ली है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, 9 से 14 साल की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर का टीका लगाकर सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है।

टीका विकसित करने में जुटे हैं कई शोध संस्थान 

रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनियाभर के कई शोध संस्थानों में विभिन्न प्रकार के कैंसर टीके विकिसत करने की प्रक्रिया पर कार्य किए जा रहे हैं। प्रोस्टेट, ओवरी (ovary cancer), मेलानोमा (melanoma), गैस्ट्रिक कैंसर (Gastric cancer) के विकास को रोकने और इससे मुकाबले के लिए टीकों को विकसित करने का प्रयास जारी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि कैंसर की रोकथाम और इसके लिए प्रभावी टीकों (Cancer prevention and effective vaccines) को विकसित करने में अभी एक दशक का वक्त लग सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: caasindia.in में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को caasindia.in के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। caasindia.in लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी/विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

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