Wednesday, April 17, 2024
HomeOther Diseasesक्या कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल से मिलेगी ऑटोइम्यून बीमारी के मरीजों को राहत

क्या कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल से मिलेगी ऑटोइम्यून बीमारी के मरीजों को राहत

Join Whatsapp Channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
Follow Google News Join Now
कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल के बारे में दावा किया जा रहा है कि ऑटोइम्यून बीमारियों से पीडित मरीजों के लिए यह राहत साबित हो रहा है। कितना दम है इस दावे में…

नई दिल्ली : ऑटोइम्यून बीमारी मेडिकल साइंस के लिए पहेली है तो मरीजों के लिए जीते जी बडी शारीरिक चुनौती। अगर इसकी पीडा का प्रभाव पता लगाना है, तो इससे पीडितों के मन को समझना जरूरी हो जाता है। मरीज लगातार किसी ऐसे उपचार की खोज में जुटे रहते हैं, जो उन्हें राहत दिला सके।
इस तलाश मेें कई बार उन्हें कुछ ऐसा पता चलता है, जो उन्हें राहत दिला सकती है, तो मरीज हर तरह से उस उपाए को अपनाने की कोशिश मेें जुट जाते हैं। उनकी पीडा और मजबूरी का फायदा भी खूब उठाया जा रहा है। राहत की यह खोज कब खत्म होगी किसी को पता नहीं है लेकिन हर किसी के मन में आशा और जिज्ञासा लगातार बनी हुई है। 


कुछ वर्षों से मेडिकल गलियारे में ऑटो इम्यून रोगियों को राहत देने वाली एक नई चिकित्सकीय मॉडल के बारे में चर्चा है। इस मॉडल को कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल कहा जाता है। वर्ष 2012-13 के दौरान हैदराबाद और बंगलुरू में ऑटोइम्यून बीमारियों (Autoimmune Disease) से पीडित रोगियों पर इस प्रोटोकॉल का प्रयोग किया गया था और इसके बाद  विशेषज्ञों ने इसे एक सफल  प्रयोग भी करार दिया था। 
क्या कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल से मिलेगी ऑटोइम्यून बीमारी के मरीजों को राहत
क्या कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल से मिलेगी ऑटोइम्यून बीमारी के मरीजों को राहत

The treatment strategies of autoimmune disease may need a …

In spite of all these advances cure or long-lasting remission still remains elusive in majority of systemic Ads, i.e., rheumatoid arthritis (RA), SLE, …

आखिर क्या है यह कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल :

इस प्रोटोकॉल को चार चरणों में लागू किया जाता है। पहले चरण में इम्यून मॉडयूलेशन किया जाता है। इसके बाद आगे के तीन महीनों में एक खास तरह की  स्टेम सेल एपीएससी का मरीजों में प्रत्यारोपण किया जाता है। ये सेल्स ऑटोलोगस होते हैं। इन्हें मरीज की ही अस्थिमंज्जा या रक्त से तैयार किया जाता है। जानकारी के मुताबिक इस तरह की सुविधा दुनिया के चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध है और सौभाग्य से इसकी उपलब्धता भारत में भी है। 

मच्छरजनित रोगों से निपटने में मदद करेंगे कीट वैज्ञानिक 

डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, लिम्फोटिक फाइलेरिया और जीका वायरस जैसी मच्छरजनित बीमारियों से निपटने के

दावा : इन बीमारियों में मिलती है राहत :

डायबिटीज-  टाइप 1
रूमेटाइड अर्थराइटिस
मल्टीपल स्कलीरोसिस
एनकायलूजिंग स्पान्डिलाइसिटस
रियेक्टिव अर्थराइटिस

एम्स : डिप्रेशन पीडितों की होगी जिनोम सिक्वेंसिंग, 1500 मरीजों पर होगा रिसर्च 

डिप्रेशन पीडितों को लेकर एक बडी रिसर्च शुरू की गई है। 1500 मरीजों पर की जाने वाली इस रिसर्च में उनकी ज

शुरूआती मरीजों में इसके परिणाम बेहतर : 

इम्यून मॉडयूलेशन के बारे में यह दावा किया गया है कि यह ऑटोइम्यून बीमारियों से पीडित शुरूआती अवस्था के मरीजों पर इसके काफी अच्छे परिणाम पाए गए हैं। नेचर पत्रिका के एक लेख के जरिए अमेरिकी वैज्ञानिक डेविड मिलर ने इन बीमारियों के उपचार में नैनो तकनीक के प्रयोग का सुझाव दिया था। इन लाइलाज बीमारियों के उपचार में रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करने वाली दवा कार्टिसोन का उपयोग किया जाता है।

दिल्ली : अब इस निजी अस्पताल में निशुल्क मिलेगी DR-TB की दवा 

DR-TB नियंत्रण की दिशा में सरकार के साथ मिलकर  काम करेगा प्राइवेट अस्पताल  दिल्ली के
यह एक स्टेरॉयड है लेकिन इस तरह की दवाओं के लंबे समय तक उपयोग के गंभीर दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं। चुनिंदा लेकिन कुछ मामलों में इन दवाओं के प्रयोग करने वाल मरीजों में नए संक्रमण और कैंसर तक होने की बात भी सामने आ चुकी है। इसलिए इन दवाओं से अलग उपचार के लिए एक नए विकल्प की तलाश में विशेषज्ञ लगातार प्रयास कर रहे हैं। दावा है कि कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल वाला यह मॉडल इन दवाओं का बेहतर विकल्प बन सकता है और इसका असर भी अच्छा साबित हो सकता है। 
नोट : अगर आप में से किसी ने कॉम्बिनेशन प्रोटोकॉल से उपचार कराया है तो आप हमसे हमारे मेल एड्रेस के जरिए संपर्क कर सकते हैं। हमारी कोशिश रहेगी कि आगे लेख में हम इस उपचार तकनीक के बारे में इसके विशेषज्ञों से बातचीत कर और जानकारी साझा करेंगे। 

Read : Latest Health News | Breaking News | Autoimmune Disease News | Latest Research |  on  https://caasindia.in | caas india is a Multilanguage Website | You Can Select Your Language from Social Bar Menu on the Top of the Website 

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: caasindia.in में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को caasindia.in के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। caasindia.in लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी/विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

caasindia.in सामुदायिक स्वास्थ्य को समर्पित हेल्थ न्यूज की वेबसाइट

Read : Latest Health News|Breaking News|Autoimmune Disease News|Latest Research | on https://www.caasindia.in|caas india is a multilingual website. You can read news in your preferred language. Change of language is available at Main Menu Bar (At top of website).
Join Whatsapp Channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
Follow Google News Join Now
Caas India - Ankylosing Spondylitis News in Hindi
Caas India - Ankylosing Spondylitis News in Hindihttps://caasindia.in
Welcome to caasindia.in, your go-to destination for the latest ankylosing spondylitis news in hindi, other health news, articles, health tips, lifestyle tips and lateset research in the health sector.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Article