Saturday, July 13, 2024
HomeNewsDelhiDelhi Aiims : डेंटल ट्रॉमा स्प्लिंट से टूटे दांत जोड़ेगा एम्स

Delhi Aiims : डेंटल ट्रॉमा स्प्लिंट से टूटे दांत जोड़ेगा एम्स

Join Whatsapp Channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
Follow Google News Join Now

IIT और एम्स (Aiims) ने मिलकर तैयार किया डेंटल ट्रॉमा स्प्लिंट (Dental trauma splint)

Delhi Aiims : दिल्ली एम्स (Aiims) और आईआईटी (IIT) की संयुक्त तकनीक से अब दुर्घटना में टूटे दांत को एम्स 3डी प्रिंटिंग तकनीक (AIIMS 3D Printing Technology) से जोड़ा जाएगा।
एम्स के दंत चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (AIIMS Dental Education and Research Center) के बाल चिकित्सा और निवारक दंत चिकित्सा विभाग (Pediatrics and preventive dental department Aiims) ने आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के इंजीनियर और एम्स फॉरेंसिक लैब (Delhi AIIMS Forensic Lab) के डॉक्टरों के साथ मिलकर डेंटल ट्रॉमा स्प्लिंट (Aiims Dental trauma splint) का निर्माण किया है।
यह तार 3डी मुद्रित सिलिकॉन आधारित डिजाइन (3D printed silicone -based design) पर तैयार किया गया है। इस तार की मदद से टूटा हुआ दांत फिक्स कर दिया जाएगा (Broken tooth will be fixed with the help of wire in Aiims) और वह अपनी जगह से नहीं हिलेगा। इस तकनीक से मरीजों की रिकवरी (घाव भरने की गति) भी तेज हो जाएगी। सामान्य तार लगाने के दौरान खून का अधिक रिसाव होता है और संक्रमण की भी संभावना बनी रहती है।
Delhi Aiims Dental trauma splint trial में मिले बेहतर परिणाम

एम्स (Aiims Delhi) के डॉक्टर सौरभ शर्मा (doctor Saurabh Sharma AIIMS) के मुताबिक, इस नई तकनीक के ट्रायल (Aiims New technology trial) के दौरान पुराने तरीके से लगाए जाने वाले तार और 3डी प्रिंटिंग की मदद से लगाए गए तार का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। ट्रायल में पांच शवों पर दोनों ही तकनीक से तार फिक्स किए गए।

Also Read : Delhi News : दिल्ली में तैयार हो रहा है सबसे बडा ट्रॉमा सेंटर, इस क्षेत्र को मिलेगा लाभ

दोनों के परिणाम में काफी समानता पाई गई। जबकि, नई तकनीक से दुर्घटना के दौरान लोगों के टूटे हुए दांतों को फिक्स किया गया। इसके परिणाम भी बेहतर पाए गए। खून के रिसाव से होने वाले संक्रमण को भी रोकने में कामयाबी मिली। डॉ. शर्मा के मुताबिक आगे इस तकनीक के और भी ट्रायल किए जाएंगे।

Delhi Aiims : भारतीय लोगों के जबडे को ध्यान में रखते हुए तकनीक विकसित 

3D प्रिंटिंग से टूटे दांत जोडेगा एम्स
3D प्रिंटिंग से टूटे दांत जोडेगा एम्स | Photo : Canva
एम्स (Aiims) बाल चिकित्सा और निवारक दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. सौरभ शर्मा (Dr. Saurabh Sharma of AIIMS Pediatric and Prevention Dental Department) के मुताबिक, यह तकनीक भारतीय लोगों के जबडे को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। इसके स्पिलंट में 66 एमएम का तार (66 mm wire in splaint) लगाया गया है।
जिसे आसानी से दांत के आगे वाले हिस्से में फिक्स किया जा सकेगा। वहीं, तार फिक्स करने के दौरान जो खून का रिसाव होता है, उसे जैली की मदद से रोकी जाएगी। अभी तक दांत को जोडने के लिए सामान्य तार का इस्तेमाल किया जा रहा था। सामान्य तार को लगाने के दौरान दांत हिल जाते हैं।
वहीं, खून का रिसाव भी अधिक मात्रा में होता है। इससे संक्रमण की संभावना भी बढ जाती है। 3 डी प्रिंटिंग से तैयार तार (Wire prepared from 3D printing) आसानी से फिक्स किया जा सकता है। इस तकनीक के तहत एक ही तार लगाया जाता है, जो मजबूत होने के साथ खूबसूरत भी है।

हादसे में अक्सर टूट जाते हैं आगे के दांत : 

3D प्रिंटिंग से टूटे दांत जोडेगा एम्स
3D प्रिंटिंग से टूटे दांत जोडेगा एम्स | Photo : Canva
एम्स (Aiims) में आने वाले दुर्घटना प्रभावित मरीजों के आंकडों (Data of accident affected patients coming to AIIMS) के मुताबिक, हादसे में ज्यादातर लोगों के आगे के दांत आधे टूटे हुए होते हैं। वहीं, कई मरीजों के दांत अपनी जगह से हिल भी जाते हैं।
डॉक्टरों (Delhi Aiims) के मुताबिक दुर्घटना के दौरान मुंह के बल गिरने वाले मरीजों में आगे के दांत टूटने की आशंका ज्यादा होती है। कई बार एक से अधिक दांत भी टूटे हुए होते हैं। दुर्घटना के दौरान कई बार मरीजों के जबडे में भी फ्रैक्चर हो जाता है। नई तकनीक से मरीजों के टूटे हुए दांतों को जहां बेहतर और जोखिम मुक्त तरीके से जोडा जा सकेगा।
वहीं, उनके घाव के भी जल्दी भरने की संभावना अधिक होगी। एम्स (Delhi Aiims) विशेषज्ञों के मुताबिक आगे होने वाले परीक्षणों को लेकर वे उत्साहित हैं। उम्मीद है कि एम्स (delhi aiims) विशेषज्ञ इस तकनीक को और भी अधिक उन्न्त बनाएंगे, जिससे दुर्घटना पीडित मरीजों के टूटे दांत को जोडने में आसानी होगी और उन्हें संक्रमण का भी जोखिम नहीं रहेगा। मौजूदा तकनीक की यह विशेषता है कि इस तकनीक से दांत जोडने पर घाव भी तेजी से भरते हैं। जिससे मरीजों को तेजी से रिकवरी करने में भी असानी होती है। इससे मरीजों को होने वाली तकलीफ भी कम होती है।


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: caasindia.in में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को caasindia.in के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। caasindia.in लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी/विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

caasindia.in सामुदायिक स्वास्थ्य को समर्पित हेल्थ न्यूज की वेबसाइट

Read : Latest Health News|Breaking News|Autoimmune Disease News|Latest Research | on https://www.caasindia.in|caas india is a multilingual website. You can read news in your preferred language. Change of language is available at Main Menu Bar (At top of website).
Join Whatsapp Channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
Follow Google News Join Now
Caas India - Ankylosing Spondylitis News in Hindi
Caas India - Ankylosing Spondylitis News in Hindihttps://caasindia.in
Welcome to caasindia.in, your go-to destination for the latest ankylosing spondylitis news in hindi, other health news, articles, health tips, lifestyle tips and lateset research in the health sector.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Article