Sunday, April 21, 2024
HomeNewsDelhiDelhi Aiims : Bedridden Patients के लिए एम्स ने बनाया Stool Management...

Delhi Aiims : Bedridden Patients के लिए एम्स ने बनाया Stool Management Kit 

Join Whatsapp Channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
Follow Google News Join Now

बिस्तर पर लेटे हुए मरीजों को डायरपर से मिलेगी आजादी

Delhi Aiims : लंबे समय तक बेडरिडेन रह रहे मरीजों (Bedridden Patients) के लिए दिल्ली एम्स का स्टूल मैनेजमेंट किट (AIIMS Stool Management Kit)  बडी राहत साबित हो सकती है। ऐसे मरीजों में संक्रमण का उच्च जोखिम होता है। बिस्तर पर शौच कर रहे मरीजों को संक्रमण की वजह से अन्य तरह की समस्याएं चपेट में ले लेती है। ऐसे मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए दिल्ली एम्स ने विशेष उपकरण का निर्माण किया है।

Bedridden Patients में 22 प्रतिशत तक बढती है संक्रमण की संभावना 

इस मामले में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, बेडरिडेन मरीजों में संक्रमण की संभावना (Possibility of infection in bedridden patients) 22 प्रतिशत तक बढ जाती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग (Gastroenterology department of AIIMS) ने न्यूरोलॉजी (Neurology), जनरल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी (General Gastrointestinal Surgery), एम्स के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बायो डिजाइन (AIIMS School of International Bio-Design) और अन्य विभागों के साथ मिलकर स्टूल मैनेजमेंट किट (stool management kit) तैयार किया है।
इसके ट्रायल के परिणाम भी बेहतर पाए गए हैं। 30 जनवरी को एम्स के रिसर्च डे (AIIMS Research Day) के मौके पर इसे सार्वजनिक किया जाएगा। इस किट को इंस्टॉल करने के बाद बेडरिडेन मरीज को बार-बार डायपर, कपडे और बेडसीट बदलने की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। इसके साथ ही संक्रमण को जोखिम भी पूरी तरह से शून्य हो जाएगा।

Delhi Aiims : मरीजों की देखभाल के स्तर में होगा सुधार 

संबंधित मामले के विशेषज्ञों के मुताबिक, बिस्तर पर शौच करने वाले मरीजों को लेकर एक समय के बाद परिवार के सदस्यों की सेवा भावना भी प्रभावित हो जाती है।  उन्हें शौच करवाना उनके लिए बडी समस्या साबित होने लगती है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी इस चुनौती से निपटने के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पडता है।
कई बार उनके डायपर, कपडे और बेडसीट बदलने पडते हैं। इस उपकरण (AIIMS Stool Management Kit)  की मदद से मरीजों की देखभाल में काफी आसानी हो जाएगी। वहीं, उनके रिकवरी की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।

मरीजों को किसी पर निर्भर रहने की नहीं पडेगी जरूरत

एम्स (Delhi Aiims) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग (Gastroenterology department of AIIMS) के प्रोफेसर गोविंद मखारिया (Professor Govind Makharia) के मुताबिक, बिस्तर पर रहते हुए किसी भी मरीज के लिए मल त्याग करना आसान नहीं होता है। इससे संक्रमण की संभावनाएं तो बढती ही हैं, मरीजों के सम्मान को भी चोट पहुंचती है।
देश में हर साल हजारों मरीजों को लंबे समय तक बिस्तर पर रहकर ही मल त्याग करना पड़ता है। इस किट को मरीज के मलाशय से जोड दिया जाता है और मल सीधे बैग में पहुंच जाता है। जिससे संक्रमण का जोखिम भी पूरी तरह से खत्म हो जाता है। सबसे खास बात यह है कि मल त्याग करने के बाद उसे साफ करने के लिए मरीज को किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं होना होता है।

ऐसे काम करता है Aiims Stool Management Kit

Delhi Aiims : Bedridden Patients के लिए एम्स ने बनाया Stool Management Kit
Delhi Aiims : Bedridden Patients के लिए एम्स ने बनाया Stool Management Kit
उपकरण का एक हिस्सा शरीर के पिछले भाग में लगा दिया जाता है। इस हिस्से में एक विशेष तरह का ट्यूब होता है, जो शरीर के पिछले हिस्से (rectum) में जाकर मल के रास्ते को कवर कर लेता है। ऐसे में जब भी मरीज मल त्याग करता है, करीब डेढ़ मीटर पाइप के रास्ते वह बैग में इकट्ठा हो जाता है। बैग भरने के बाद आसानी से बैग बदला जा सकता है। इस उपकरण को एक बार लगाने के बाद इसे अधिकतम 29 दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

Bedridden Patients के लिए चुनौतियां 

  • 22 प्रतिशत मरीजों में बढ़ जाता है संक्रमण को जोखिम
  • 7 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण की वजह से दूसरे रोगों के होने का बढता है खतरा
  • संक्रामक रोगों की वजह से बढता है मौत का आंकडा
  • आईसीयू वाले मरीजों को ज्यादा दिनों तक अस्पताल में रहना पडता है भर्ती
  • बेडरिडेन मरीजों को होने वाली बीमारियां | Diseases Occurring in Bedridden Patients
  • बेडसोर (दबाव अल्सर)
  • मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई)
  • त्वचा संक्रमण
  • मल के साथ खून रिसाव होना

 


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: caasindia.in में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को caasindia.in के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। caasindia.in लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी/विषय के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

caasindia.in सामुदायिक स्वास्थ्य को समर्पित हेल्थ न्यूज की वेबसाइट

Read : Latest Health News|Breaking News|Autoimmune Disease News|Latest Research | on https://www.caasindia.in|caas india is a multilingual website. You can read news in your preferred language. Change of language is available at Main Menu Bar (At top of website).
Join Whatsapp Channel Join Now
Join Telegram Group Join Now
Follow Google News Join Now
Caas India - Ankylosing Spondylitis News in Hindi
Caas India - Ankylosing Spondylitis News in Hindihttps://caasindia.in
Welcome to caasindia.in, your go-to destination for the latest ankylosing spondylitis news in hindi, other health news, articles, health tips, lifestyle tips and lateset research in the health sector.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Article